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दिवाली पर किसानों को प्रधानमंत्री की ओर से बड़ी सौगात,आज शुरू की गई ₹35,440 करोड़ की 3 मेगा योजनाएं योजनाओं का सही रूप से कार्यान्वन किया जाना आवश्यक : शंकर ठक्कर

  • ssoni43
  • Oct 11, 2025
  • 2 min read

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दलहन के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में 35,440 करोड़ रुपये की दो महत्वपूर्ण कृषि योजनाओं की शुरुआत की। इनमें ‘पीएम धन धान्य कृषि योजना’ और ‘आत्मनिर्भरता मिशन - दलहन’ शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र के लिए दो बड़ी योजनाओं का शुभारंभ किया। ये योजनाएं कृषि आत्मनिर्भरता, किसान कल्याण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

पीएम धन धान्य कृषि योजना:

इस कार्यक्रम की मुख्य योजना ‘पीएम धन धान्य कृषि योजना’ है, जिसका कुल परिव्यय 24,000 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने और पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर भंडारण सुविधाओं में सुधार करना है। साथ ही 100 चयनित जिलों में सिंचाई की व्यवस्था और ऋण सुविधा को भी सुलभ बनाया जाएगा।

आज प्रधानमंत्री ने 11,440 करोड़ की दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की भी शुरुआत की इसका उद्देश्य देश को दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इस मिशन के तहत दालों की उत्पादकता बढ़ाने, खेती के रकबे को विस्तार देने, मूल्य श्रृंखला (खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण) को मजबूत करने और घाटे को कम करने पर जोर दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त पीएम मोदी ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। साथ ही 815 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी गई।

बेंगलुरु और जम्मू-कश्मीर में कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण केंद्र

असम में IVF प्रयोगशाला (राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत)

मेहसाणा, इंदौर और भीलवाड़ा में दूध पाउडर संयंत्र, तेजपुर में मछली चारा संयंत्र (प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत)।

*शंकर ठक्कर ने आगे कहा सरकार की घोषणाओं को धरातल तक लेकर जाने की आवश्यकता है अन्यथा देश का राजस्व खर्च हो जाता है लेकिन उससे योजनाओं का लाभ देश हित में में नहीं हो पाता है।



 
 
 

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