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*पश्चिम रेलवे द्वारा ऊर्जा संरक्षण के बेहतर उपायों की पहल*

  • ssoni43
  • Oct 17, 2025
  • 2 min read

Mumbai

आज के दौर में जहाँ ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है, रेलवे द्वारा अपने नेटवर्क में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल मंडल के बिजली विभाग द्वारा बिजली की खपत कम करने, परिचालन दक्षता में सुधार लाने और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने के उद्देश्य से ऊर्जा-बचत पहल शुरू की गई है। ये प्रयास एक हरित भविष्य के निर्माण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, स्थिरता और ऊर्जा दक्षता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अंतर्गत पश्चिम रेलवे द्वारा कई प्रभावशाली ऊर्जा संरक्षण अभियान शुरू किए गए हैं। ये प्रयास भारतीय रेल की पर्यावरण संरक्षण और परिचालन दक्षता के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप हैं।

इस पहल के अंतर्गत, मुंबई सेंट्रल मंडल के स्टेशनों और सेवा भवनों पर लगभग 12,500 ऊर्जा-कुशल ब्रशलेस डायरेक्ट करंट (BLDC) पंखे लगाए गए हैं। बीएलडीसी पंखे पारंपरिक सीलिंग पंखों की अपेक्षा लगभग 40% कम बिजली का उपयोग करते हैं, साथ ही ये अधिक शांत, टिकाऊ और उच्च प्रदर्शन वाले होते हैं। इसके अलावा, मंडल द्वारा स्टेशनों, कार्यालयों और सेवा क्षेत्रों में 1,48,700 से अधिक एलईडी फिक्स्चर लगाकर ऊर्जा-कुशल एलईडी प्रकाश व्यवस्था में पूर्ण परिवर्तन हासिल किया गया है। इस पहल से बिजली की खपत और रखरखाव की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।

यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और ऊर्जा दक्षता बनाए रखने के लिए, दादर, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली, भायंदर, सूरत, उधना, नंदुरबार और वापी सहित प्रमुख स्टेशनों पर 10 प्राकृतिक वाटर कूलर लगाए गए हैं। ये कूलर बिना कंप्रेसर के काम करते हैं और इनकी शीतलन क्षमता 45 लीटर प्रति घंटा है। ये 150 लीटर तक पानी संग्रहित कर सकते हैं। ये कूलर न्यूनतम ऊर्जा का उपयोग करते हुए 23°C से 27°C के बीच तापमान बनाए रखते हैं।

इसके अतिरिक्त, मुंबई सेंट्रल मंडल में एयर-कंडीशनिंग सिस्टम को और अधिक कुशलता से अनुकूलित करने के लिए 1,200 से ज़्यादा ऑक्यूपेंसी सेंसर लगाए गए हैं। ये स्मार्ट सेंसर मानवीय उपस्थिति का पता लगाते हैं और स्वचालित रूप से एयर-कंडीशनिंग को समायोजित करते हैं, जिससे खाली कमरों में अनावश्यक ऊर्जा की खपत कम होती है।

 
 
 

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