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*गन्ने की कमजोर फसल के चलते फरवरी मध्य में ही 77 चीनी मिलें हुई बंद*:: *कम पैदावार एवं कमजोर रिकवरी के कारण दाम बढ़ सकते हैं : शंकर ठक्कर*

  • ssoni43
  • Feb 16, 2025
  • 3 min read

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया इस वर्ष गन्ने की कमजोरी फसल के चलते पर्याप्त मात्रा में गन्ना न मिलने से उद्योग के सामने संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) द्वारा 15 फरवरी को जारी रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सत्र 2024-25 में अब तक 77 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं जबकि पिछले साल इस अवधि तक 28 चीनी मिलें ही बंद हुई थीं।

देश में चीनी उद्योग के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है। गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण फरवरी के मध्य में ही 77 चीनी मिलों ने संचालन बंद कर दिया है और कई चीनी मिलें सत्र समाप्ति का नोटिस दे चुकी हैं। गन्ना न मिलने के कारण फरवरी के आखिर तक बड़ी तादाद में चीनी मिलें बंद हो जाएंगी।

आम तौर पर चीनी मिलें मार्च-अप्रैल तक चलती हैं। लेकिन इस साल गन्ने की फसल पर मौसम और रोगों की मार के कारण गन्ना उत्पादन को तगड़ा झटका लगा है। चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है जिसका असर देश के चीनी उत्पादन पर भी पड़ रहा है। इस साल का देश का चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 15 फीसदी घटकर 270 लाख टन के आसपास रह सकता है।

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) द्वारा 15 फरवरी को जारी रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सत्र 2024-25 में अब तक 77 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 28 चीनी मिलें बंद हुई थीं। सबसे ज्यादा कर्नाटक में 34 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी है जबकि महाराष्ट्र में 30 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। तमिलनाडु में 4, उत्तर प्रदेश में 2, तेलंगाना में 2, उत्तराखंड में 2 और हरियाणा में 1 मिल में पेराई बंद हो चुकी है।

एनएफसीएसएफ के अनुसार, 15 फरवरी तक देश में कुल 531 चीनी मिलों में से 454 चीनी मिलों में पेराई जारी है। चालू पेराई सीजन में अब तक कुल 197.65 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जो पिछले साल की इस अवधि की तुलना में करीब 12 फीसदी कम है। पिछले सीजन में इस अवधि तक 505 चीनी मिलें चालू थीं और 224.75 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था।

यूपी के बरेली जिले में गन्ना न मिल पाने के कारण चार चीनी मिलों ने फरवरी में ही सत्र समाप्ति का नोटिस दे दिया है। गन्ना जुटाने के लिए चीनी मिलों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पश्चिमी यूपी की कई चीनी मिलें फरवरी के आखिर तक संचालन बंद कर सकती है।

गन्ने की फसल खराब होने के कारण चीनी की रिकवरी भी घटी है। पिछले सीजन में इस अवधि तक देश में चीनी की औसत रिकवरी दर 9.87 फीसदी थी जो इस सीजन में घटकर 9.09 फीसदी रह गई है। सबसे ज्यादा कर्नाटक में गन्ने से चीनी की रिकवरी दर में गिरावट आई है और यह 9.75 फीसदी से घटकर 8.50 फीसदी रह गई है। यूपी में रिकवरी दर पिछले साल 10.20 फीसदी थी जो अब 9.30 फीसदी पर है।

प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल में लाल सड़न (रेड रॉट) और चोटी बेधक (टॉप बोरर) रोग के कारण बड़े पैमाने पर फसल खराब हुई है। कुछ जिलों में अधिक बारिश और बाढ़ से भी गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। इसका असर गन्ने की पैदावार और रिकवरी पर पड़ा है। राज्य की चीनी मिलें पर्याप्त गन्ना आपूर्ति के लिए जूझ रही है।

*शंकर ठक्कर ने आगे कहा इस वर्ष उत्पादन में कमी और कमजोर रिकवरी, फसल पर रोगों के कारण दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।*


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