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*जीएसटी मामले में अब गिरफ्तारी के अधिकार का नहीं हो सकेगा दुरुपयोग,लिखित में बताना होगा आधार* *कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की खबर : शंकर ठक्कर*

  • ssoni43
  • Jan 16, 2025
  • 2 min read

Mumbai

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया जीएसटी अधिकारियों के लिए अब उद्यमियों और कारोबारियों को गिरफ्तार करना आसान नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अब अधिकारियों को गिरफ्तारी का कारण बताने के बजाय गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देने होंगे। इस कदम का उद्देश्य गिरफ्तारी के दुरुपयोग को रोकना और उद्यमियों के अधिकारों की रक्षा करना है। इस संबंध में जीएसटी अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

13 जनवरी को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने जारी किया निर्देश इससे गिरफ्तारी की स्थिति बदल जाएंगी। ग्राउंड ऑफ अरेस्ट कारोबारी को लिखित रूप में देना होगा।

जीएसटी के अधिकारियों के लिए अब उद्यमियों व कारोबारियों को गिरफ्तार करना आसान नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए जीएसटी के अधिकारियों से कहा गया है कि वे अब रीजन फार अरेस्ट नहीं बताएंगे। इसकी जगह गिरफ्तार किए जाने वाले उद्यमी या कारोबारी को ग्राउंड्स आफ अरेस्ट लिखित रूप से देना होगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 13 जनवरी को इसके संबंध में निर्देश जारी किया है।

अभी तक किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाते समय रीजन फार अरेस्ट (गिरफ्तारी का कारण) बताना होता है। जीएसटी के अधिकारी भी इसी के तहत उद्यमियों या कारोबारियों को गिरफ्तार करते समय उन्हें रीजन फार अरेस्ट बताते हैं।

जीएसटी अधिकारियों द्वारा इस तरह की जाने वाली गिरफ्तारी पर 15 मई 2024 को आदेश दिया था कि रीजन फॉर अरेस्ट की जगह उन्हें ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट बताना चाहिए। इसके बाद भी एक और मामला हुआ जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2024 को अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकारी उस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं।

अभी तक अधिकारी गिरफ्तारी के समय एक तय फार्मट पर रीजन फार अरेस्ट उद्यमियों व कारोबारियों को पकड़ा देते थे जिसमें बताया जाता था कि मामला कर चोरी का प्रतीत होता है। जब तक हम जांच कर रहे हैं तब तक जांच में कोई गड़बड़ी न करें, इसलिए इन्हें गिरफ्तार कर रहे हैं।

*शंकर ठक्कर ने आगे कहा पहले गिरफ्तारी में कारोबारी की तीन चार माह में जमानत होती थी लेकिन छवि खराब होती थी। इसलिए अब अधिकारियों को गिरफ्तारी के आधार में सभी जानकारी देनी होगी और इसके लिए सजग रहना होगा। इस फैसले से कर दाता का उत्पीड़न कम होगा और राहत मिलेगी।*

 
 
 

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