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*माँ दिवाली बेन भील माँ शबरी का अवतार है*: *हार्दिक हुंडीया* दिवाली बेन भील की १० वी पूण्यतिथी पर उनकी प्रतिमा के मुंबई में प्रथम दर्शन

  • ssoni43
  • May 20, 2025
  • 2 min read

हीरा माणेक ग्रुप के संस्थापक हार्दिक हुंडीया द्वारा जुनागढ़ में पद्मश्री दिवाली बेन भील की प्रतिमा स्थापित होगी।

आज मुंबई में स्टार रिपोर्ट मेगेज़िन के कार्यालय में पद्मश्री दिवाली बेन भील की पूण्यतिथी पर उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया है।पुरे कार्यालय को उनके लोकप्रिय गीत मारे टोडले बैठो मोर की थीम पर तैयार किया गया। जहां उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया।इस अवसर पर लोकगायक हरेश पुरोहित जिनकी प्रेरणा दिवाली बेन भील रहे हैं और उनको वोईस ओफ दिवाली बेन से पहचाना जाता है उनके हाथों से माल्यार्पण किया गया।

हीरा माणेक ग्रुप के संस्थापक हार्दिक हुंडिया द्वारा गुजराती अस्मिता और संस्कृति को हमेंशा सर पर पल्लू रखकर देश का गौरव बढ़ाने वाले आदरणीय दिवाली बेन भील की प्रतिमा सौराष्ट्र के जुनागढ़ शहर के बस स्टैंड चौक पर स्थापित कि जायेगी और उस चौक को दिवाली बेन भील चोक नाम दिया जायेगा।हार्दिक हुंडिया और सुनिता हुंडिया द्वारा आदरणीय दिवाली बेन का मातृवंदना कार्यक्रम के तहत जुनागढ़ में उनके पैर दुध से धोकर उनको जब सम्मानित किया था तब उन्होंने उनका लोकप्रिय गीत मारे टोडले बैठो मोर क्यां बोले गाया था। हार्दिक भाई हुंडिया ने जुनागढ़ नगरपालिका के सभी मान्यवर का आभार मानते हुए कहा की यह प्रतिमा आदरणीय दिवाली बेन को युगों युगों तक अमरत्व प्रदान करेगी।संतों , महंतों और लोक कलाकार की पवित्र भूमि जुनागढ़ में अगला जन्म मिले यह कहते हुए हार्दिक भाई ने कहा कि जब दिवाली बेन से मुलाकात हुई तब ऐसा लगा जैसे रामभक्त माँ शबरी के दर्शन हुए ।आदीवासी महिला आदरणीय दिवाली बेन भील ने अपने जीवनकाल में हजारों लोकगीत और भजन गाकर विश्व में लोकप्रियता हांसील की है। पीछले ३० से ३५ सालों से जिनके मार्गदर्शन में हजारों मार्बल की मूर्ति और मंदिरों का जिन्होंने निर्माण कीया है , ऐसे बेजोड़ शिल्पी चंद्र प्रकाश जैन ने जैन धर्म के २४८ घर मंदिर और ४ शिखर बंद मंदिर का नीर्माण कीया है।

उनके मार्गदर्शन में सनातन धर्म की प्रतिमा तैयार होती है।एक मूर्ति बहुत लंबी प्रक्रिया से तैयार होती है यह कहते हुए चंद्र प्रकाश जैन कहते हैं कि प्रतिमा बनाने के लिए राजस्थान की खास मीट्टी कपड छाण को कपड़े से छान कर उस मिट्टी को लकड़ी के बोड़ी स्ट्रक्चर में ढाला जाता है। मीट्टी के पींड से प्रतिमा के आकर तक कि प्रक्रिया बहुत ही मंजे हुए आर्टिस्ट इस पर महेनत करते हैं।चंद्र प्रकाश जैन के मार्गदर्शन के हिसाब से मीट्टी से मार्बल तक कि पुरी प्रक्रिया पर छोटी छोटी बातों पर विशेष ध्यान रखकर यह प्रतिमा तैयार होती है। इटालियन मार्बल से यह पुरी मूर्ति को उनके फोटो के हीसाब से आर्टिस्ट छोटी छोटी बारीकियां पर काम करते है। जिसको स्केल आर्ट कहा जाता है। आंखों के भाव, मुंह के भाव उसके साथ साथ उम्र के हिसाब से झुर्रियां यह सब बात को मूर्ति बनाते समय चंद्र प्रकाश जैन आर्टिस्ट को मार्गदर्शन देते हैं उस हीसाब से प्रतिमा तैयार होती है। जुनागढ़ दिवाली बेन भील की लोकगायन एंव गुजराती गरबा गाने की कर्मभूमि है। हार्दिक हुंडिया ने कहा की इस मूर्ति की स्थापना से आदरणीय पद्मश्री दिवाली बेन भील युगों तक अमर रहेगी।

 
 
 

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